Tujhe Bahon Mei Samet Na Sakaतेरे इश्क में फना हो जाता मै,
गर उम्मीद का साथ न होता.

अभी विरह की रात सही,
मिलन की सहर का आगाज़ कभी तो होगा.

बाँहों में अपनी तुझे समेट ना सका कभी तो क्या,
तेरी मज़ार के पहलु में एक पत्थर मेरे नाम का तो होगा.