
heart says


थोड़ा ठहर जाओ
थोड़ा ठहर जाओ ऐ सहर कि तन्हाई अभी बाकी है।। थोड़ा ठहर जाओ ऐ हवाओं कि फिज़ा में उनकी खुशबू अभी बाकी है।। थोड़ा ठहर जाओ ऐ बारिश कि आँखो में समंदर अभी बाकी है।। थोड़ा ठहर जाओ ऐ जिंदगी कि उनकी यादें अभी बाकी है।।




कहीं तुम आओ
नींद आती नहीं आजकल। कहीं तुम आओ और मैं सोता ना रह जाऊं।। गर तुम वादा निभाओ सपनो में आने का। दो पल क्या, मैं हमेशा के लिए सो जाऊं।।

कदम नहीं उठते
जब से दीदार हुआ तेरा। मयकदे की तरफ कदम नहीं उठते।। जब से सुनी तेरी हँसी की आवाज़। महफिलों की तरफ कदम नहीं उठते।। जब से मोहब्बत हुई तुमसे। इबादतगाह की तरफ कदम नहीं उठते।। जब से हुई तुझे अपना बनाने की चाहत। अपने जनाजे की तरफ कदम नहीं उठते।।

ज़माना कहता है
ज़माना कहता है कि नज़र कमजोर है। मैं कहता हूं तेरी तस्वीर बसी है इनमें।। ज़माना कहता है कि ये झुर्रियां हैं। मैं कहता हूं तेरी यादों में गुजारी रातों की गिनती है।। अब तलक इंतजार है तेरे दीदार का। डरता हूं कि इससे पहले सांसें बेवफ़ा न हो जाएं।।



मुहब्ब्त नही मिलती
माँगने से मुहब्ब्त नही मिलती, फरियाद करने से दुआ नही मिलती.याद करें क्यों उनको हम. जिनसे हमारी तकदीर नही बनती.
