कदम नहीं उठते

कदम नहीं उठते

जब से दीदार हुआ तेरा। मयकदे की तरफ कदम नहीं उठते।। जब से सुनी तेरी हँसी की आवाज़। महफिलों की तरफ कदम नहीं उठते।। जब से मोहब्बत हुई तुमसे। इबादतगाह की तरफ कदम नहीं उठते।। जब से हुई तुझे अपना बनाने की चाहत। अपने जनाजे की तरफ कदम नहीं उठते।।

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ज़माना कहता है 1

ज़माना कहता है

ज़माना कहता है कि नज़र कमजोर है। मैं कहता हूं तेरी तस्वीर बसी है इनमें।। ज़माना कहता है कि ये झुर्रियां हैं। मैं कहता हूं तेरी यादों में गुजारी रातों की गिनती है।। अब तलक इंतजार है तेरे दीदार का। डरता हूं कि इससे पहले सांसें बेवफ़ा न हो जाएं।।

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आज भी

आज भी

तेरी आँखो में दिखता है मेरा अक्स आज भी। तेरे गेसुओं से आती है मेरी खुशबू आज भी।। तेरे हाथों में खिंची है मेरी तकदीर की लकीर आज भी। तुम पास न सही, तुम्हारी तस्वीर बसी है मेरे दिल में आज भी।।

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लबों की लाली

तुम्हारे लबों की लाली , तुम्हारे गालों की सुर्खियां, तुम्हारे आँखों की नमी, तुम्हारे अश्कों की गर्माहट, तुम्हारी आवाज की लरज, कुछ भी तो नहीं बदला, बदला है तो सिर्फ… मेरे देखने का अंदाज़।।

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बाकी आज भी है…

सुखे दरख्त की गुमनाम छाँव सा। मेरी मुहब्बत का निशाँ बाकी आज भी है।। पुरानी किताब के पीले पन्नो सा। उसकी यादों का रंग मेरे वजूद पर आज भी है॥ बारिश से धुले कागज पर स्याही के निशाँ सा। उसका वो अक्स याद आज भी है॥ धुंध में लिपटे सुरज की गर्मी सा। उसकी साँसों…

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बेवफा

दूरियां इतनी तो नहीं कि तुम्हे भूल जाऊँ। गम इतने तो नहीं कि हँसना भूल जाऊँ।। अब नज़रे उठती नहीं तेरे कूचे से गुजरते हुए। बेवफा इतना तो नहीं कि किसी और से प्यार कर पाऊँ।।

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