हमसफर

humsafar उन्हे भुलाने की कोशिश में खुद को भुला बैठा। उनकी यादों को मिटाने की कोशिश में खुद को मिटा बैठा।। बिना उनके मेरा वजुद भी मेरा अपना नही रहा। लेकिन उनकी यादों का साया मेरा हमसफर बना रहा।। Continue reading →

तेरे इश्क में फना

Tujhe Bahon Mei Samet Na Saka तेरे इश्क में फना हो जाता मै, गर उम्मीद का साथ न होता. अभी विरह की रात सही, मिलन की सहर का आगाज़ कभी तो होगा. बाँहों में अपनी तुझे समेट ना सका कभी तो क्या, तेरी मज़ार के पहलु में एक पत्थर मेरे नाम का तो होगा. Continue reading →

ना कोई दोस्त ना कोई रकीब

Hijra ki Raate इशक भी अज़ीब शै है, सिर पर चढ कर बोलता है। तन्हाई भरी रातों में दिल को टटोलता है।। मेरी हिज्र की ये रातें, काटे नही कटती उनकी याद में। अपनी कहानी किससे कहूँ, सबके दिल में एक शूल है।। ना कोई दोस्त ना कोई रकीब है, जिंदगी बडी अज़ीब है। गले उनको कैसे लगाऊँ, […] Continue reading →

कयामत की आरजू

Kayamat ki Aarjoo कायनात मेरी रकीब तो नहीं। फिर मुझे कयामत की आरजू क्यों है।। मेरे नशेमन से उनकी रूखसत अब तलक याद है। आँखों में अश्क नहीं, फिर लबों पे मुस्कान क्यों है।। कयामत तक साथ रहने का, वादा उनका मुझे अब तलक याद है। क्यों कर बेवफा करार दूँ उन्हें, वो ना सही उनकी याद तो […] Continue reading →

ए तन्हाई तुझे क्या हुआ

Ashk Kyon Aaya ए जमाने ना कर इतना रश्क किस्मत पे हमारी. मुहब्बत तो हमे वो इस जहाँ मे सबसे ज्यादा करते हैं. उसका नाम तन्हाई है, जिसे लोग हमारी महबूबा कहते हैं. हमे उनसे इतनी मोहब्बत हो गयी कि किस्मत को भी रश्क हो आया. ए तन्हाई तुझे क्या हुआ, मेरे प्यार को देख तेरी आँखों में […] Continue reading →

मेरी तन्हाई भी कभी तन्हा नही आई

meri-tanhai कभी उनकी खुशबु तो कभी उनकी यादें समेट लाई। मेरे पास तो मेरी तन्हाई भी कभी तन्हा नही आई॥ रात भर मेरे बिस्तर पर बारिश होती रही, तकिया भीगता रहा। मै अपनी तन्हाई को आगोश में समेटे लेटा रहा॥ सहमी हुई सी मेरी तन्हाई। अपनी मासुम सी ऑखों से मुझे देखती रही।। फिर चुपके से […] Continue reading →

तन्हाई

Clicked by Ajay at Padampuri, Uttarakhand जब तन्हाई होती है तो उनकी याद आती है! लेकिन कम्बख्त ये तन्हाई, आती ही नही, आती है तो बस उनकी यादें!! Continue reading →

दीवानगी में patience

चित्र साभार: http://vijaygiripoet.blogspot.in/2012/03/blog-post_04.html आजकल फेसबुक (या फंसेबुक) से वास्ता काफी कम हो गया है. होली – दीवाली ही इस बुक को खोलना होता है. ऐसे ही आज खोला तो एक जानकार ने अपनी भावनाओ को कुछ इस तरह से व्यक्त किया हुआ था: क्युँ तेरे बिन सब्र कर लेते है हम दीवानो सी बेसब्री से मरते है हर […] Continue reading →